छत्तीसगढ़

नगर पालिक निगम चिरमिरी में वाटर एटीएम बने शोपीस, लाखों खर्च के बाद भी जनता को नहीं मिल रहा शुद्ध पानी

oplus_140509186चिरमिरी: नगर पालिक निगम चिरमिरी क्षेत्र में नागरिकों को कम कीमत पर शुद्ध और फिल्टर पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित किए जा रहे लगभग 10 वाटर एटीएम इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। स्थिति यह है कि जब से इन वाटर एटीएम का संचालन ‘कोरिया नीर’ से बदलकर ‘हसदेव नीर’ किया गया है, तब से क्षेत्र की जनता को फिल्टर पानी मिलना पूरी तरह बंद हो गया है। शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के जिस मुख्य उद्देश्य के साथ इन वाटर एटीएम की स्थापना की गई थी, वह आज कागजी साबित हो रहा है और योजना विफल होने से जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार, इस साल फरवरी माह में लगभग सभी वाटर एटीएम के मरम्मत और जीर्णोद्धार कार्य के लिए 10 से 12 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि की निविदा निकाली गई थी। सूत्रों का दावा है कि इस पूरे बजट का इस्तेमाल धरातल पर काम करने के बजाय केवल लीपापोती में किया गया। वाटर एटीएम के बाहर लगे पुराने ‘कोरिया नीर’ के नाम वाले स्टीकरों को हटाकर उनकी जगह ‘हसदेव नीर’ के नए स्टीकर चस्पा कर दिए गए और थोड़ा-बहुत खानापूर्ति का मरम्मत कार्य कर औपचारिकता पूरी कर ली गई। इसका परिणाम यह निकला कि इक्का-दुक्का जगहों के वाटर एटीएम को छोड़ दिया जाए तो बाकी सभी वाटर एटीएम हमेशा ताले में बंद या खराब पड़े नजर आते हैं।
इस योजना की नाकामी के पीछे प्रशासनिक उदासीनता के साथ-साथ कर्मचारियों की गंभीर समस्याएं भी जुड़ी हुई हैं। जब मौके पर तैनात कर्मचारियों से बात की गई तो उन्होंने एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाला सच बयां किया। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पिछले लगभग 48 महीनों यानी चार साल से नगर निगम द्वारा किसी प्रकार का वेतन नहीं दिया गया है। उनका कहना है कि अगर वे अपनी उपस्थिति दर्ज कराने यहां नहीं आएंगे, तो उन्हें उनका बकाया वेतन नहीं मिलेगा, इसलिए अपनी रोजी-रोटी और बकाये की उम्मीद में वे मजबूरी में आज भी इन केंद्रों पर आते हैं।
कर्मचारियों ने यह भी खुलासा किया कि मरम्मत के नाम पर ठेकेदार ने उनसे वाटर एटीएम की चाबियां ले ली थीं और चार से पांच दिनों बाद उन्हें चाभियां वापस लौटाई गईं। उस दौरान ठेकेदार ने अंदर क्या काम किया और क्या सुधार किए, इसकी कोई भी जानकारी कर्मचारियों को नहीं दी गई। चाबी मिलने के बाद कुछ दिन तक तो व्यवस्था ठीक-ठाक चली, लेकिन कुछ ही दिनों के भीतर एटीएम ने फिर से काम करना पूरी तरह बंद कर दिया।
लाखों रुपये के सरकारी फंड के दुरुपयोग, जिम्मेदारों की लापरवाही और कर्मचारियों के चार साल से रुके वेतन के कारण यह पूरी योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। शुद्ध पानी के लिए बनाई गई इस योजना के बंद होने से जहां एक ओर आम जनता को पीने के पानी के वास्ते भटकना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर लंबे समय से वेतन न मिलने के कारण कर्मचारी आर्थिक तंगी और मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं। क्षेत्रवासियों और पीड़ित कर्मचारियों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और वाटर एटीएम को जल्द से जल्द सुचारू रूप से शुरू करवाने की मांग की है।

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