सोनामनी काली मंदिर के पीछे का सच: जहां चंद रुपयों में सुधर सकती थी व्यवस्था, वहां बहा दिए गए सरकारी खजाने के लाखों रुपये
सोनामनी काली मंदिर के पीछे का सच: जहां चंद रुपयों में सुधर सकती थी व्यवस्था, वहां बहा दिए गए सरकारी खजाने के लाखों रुपये

नगर पालिक निगम चिरमिरी के वार्ड क्रमांक 40 में सोनामनी काली मंदिर के पीछे स्थित कार वाशिंग सेंटर और हल्दीबाड़ी यातायात तिराहे के पास बना नया नाला इन दिनों हर आम नागरिक की जुबान पर है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि निगम में जनता के हितों से ज्यादा चहेतों की व्यक्तिगत सुविधा और मित्रता को प्राथमिकता दी जाती है। हल्दीबाड़ी यातायात तिराहा के पास जिस छोटी सी समस्या का समाधान महज दो लाख रुपये में आसानी से हो सकता था, वहां इंजीनियरों ने अपनी मनमानी और सांठगांठ के चलते आठ लाख रुपये का भारी-भरकम बजट खर्च कर नाला तैयार करवा दिया।

वार्ड में स्थित सोनामनी काली मंदिर के पीछे चलने वाले इस कार वाशिंग सेंटर से निकलने वाला गंदा पानी लगातार सड़क पर फैल रहा था। पानी के बहाव से सड़क पर फिसलन और जलभराव की स्थिति बन जाती थी, जिससे वहां से आने-जाने वाले राहगीरों और श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। स्थानीय लोग और वाहन चालक रोज इस समस्या से दो-चार होते थे और वाशिंग सेंटर संचालक से उनकी रोजाना तू-तू मैं-मैं होना आम बात हो गई थी। जनता की इस गंभीर परेशानी को देखते हुए पार्षद ने केवल एक छोटे से क्रॉस ड्रेनेज यानी पुलियानुमा निकास की मांग की थी, ताकि पानी सही दिशा में निकल जाए और बजट का अनावश्यक दुरुपयोग न हो।
लेकिन निगम के कारिंदों और बड़े जनप्रतिनिधियों ने इस छोटी सी मांग को बड़ा अवसर बना डाला। क्रॉस ड्रेन की जगह आठ लाख रुपये की लागत से आलीशान नाला खड़ा कर दिया गया, जिससे शासन के लाखों रुपये पानी की तरह बह गए। बड़ा सवाल यह है कि जब सोनामनी काली मंदिर के पीछे और उसी क्षेत्र के अन्य हिस्सों में लोग लंबे समय से बड़ी और बुनियादी जनसमस्याओं के समाधान की मांग कर रहे हैं, तब निगम के पास बजट का रोना रो दिया जाता है। मगर जब किसी रसूखदार जनप्रतिनिधि के करीबी कार वाशिंग सेंटर वाले की निजी सुविधा का मामला आता है, तो रातों-रात लाखों रुपये के बजट वाले प्रोजेक्ट पास होकर जमीन पर उतर जाते हैं। चिरमिरी निगम की इस कार्यशैली को देखकर जनता यही कह रही है कि मित्रता हो तो ऐसी, जिससे दोस्त का धंधा भी बच जाए और सरकारी खजाने से तिजोरी भी भर जाए।




