चिरमिरी की सांस्कृतिक पहचान बन चुका ‘पंखिड़ा गरबा महोत्सव’: तीन वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा तय कर हर साल नए शिखर छू रहा यह महाउत्सव, पहले ही दिन उमड़े जनसैलाब ने गढ़ी भव्यता की नई इबारत

चिरमिरी की सांस्कृतिक पहचान बन चुका ‘पंखिड़ा गरबा महोत्सव’: तीन वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा तय कर हर साल नए शिखर छू रहा यह महाउत्सव, पहले ही दिन उमड़े जनसैलाब ने गढ़ी भव्यता की नई इबारत

चिरमिरी। छत्तीसगढ़ के कोयलांचल क्षेत्र में उत्सव और सांस्कृतिक उल्लास का पर्याय बन चुका बहुप्रतीक्षित भव्य रास गरबा महोत्सव ‘पंखिड़ा सीजन 3’ का लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में ऐसा धमाकेदार और अभूतपूर्व आगाज हुआ है, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। पिछले तीन वर्षों से लगातार सफलता की नई ऊंचाइयों को छूता आ रहा यह गरबा महोत्सव अब केवल चिरमिरी ही नहीं, बल्कि पूरे संभाग के लिए एक सांस्कृतिक महाकुंभ का रूप ले चुका है। इस वर्ष इस आयोजन ने लोकप्रियता के ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं कि उद्घाटन के पहले ही दिन स्टेडियम में उमड़े विशाल जनसैलाब ने यह साबित कर दिया कि चिरमिरी की सरजमीं पर ऐसा सांस्कृतिक उत्सव पहले कभी नहीं देखा गया था।
पारंपरिक पूजा के साथ भक्तिमय और ऊर्जावान शुरुआत भव्य आयोजन की शुरुआत पूरी सांस्कृतिक गरिमा और विधि-विधान के साथ मां जगदम्बा की पावन पूजा-अर्चना और भव्य आरती के साथ की गई। माता रानी के जयकारों और शंखनाद के बीच जैसे ही महोत्सव का श्रीगणेश हुआ, पूरा स्टेडियम अलौकिक ऊर्जा से जगमगा उठा। इसके बाद जो नजारा देखने को मिला, उसने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। प्रदेश के यशस्वी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस महोत्सव में अपनी खास उपस्थिति दर्ज कराते हुए आम जनता और युवाओं का दिल जीत लिया।

मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का अनूठा अंदाज: ढोल की थाप और डांडिया की ताल पर पत्नी संग झूमे कार्यक्रम का सबसे रोमांचक और अविस्मरणीय पल तब आया जब मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल औपचारिकताएं छोड़कर सीधे आम जनों के बीच मैदान के बीचों-बीच पहुंच गए। उत्साह से लबरेज़ मंत्री जी ने खुद गले में ढोल टांगकर जब उसकी थाप पर ताल देना शुरू किया, तो पूरा स्टेडियम झूम उठा। ढोल की गूंज और डांडिया की खनक के बीच मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अपनी पत्नी के साथ पारंपरिक गरबा की धुनों पर कदम थिरकाए। जनप्रतिनिधि और जनता के बीच की इस अद्भुत और आत्मीय घुलने-मिलने की शैली ने वहां मौजूद हजारों दर्शकों में ऐसा जोश भरा कि पूरा स्टेडियम तालियों की गड़गड़ाहट और हर्षोल्लास से गूंज उठा। मंत्री जी का यह सहज, सरल और ऊर्जावान व्यक्तित्व इस पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण बन गया।
तीन वर्षों का सफर और सफलता के नित नए आसमान पिछले तीन वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहा ‘पंखिड़ा गरबा महोत्सव’ हर गुजरते साल के साथ सफलता के नए मुकाम और मील के पत्थर गढ़ रहा है। इस आयोजन की लोकप्रियता का दायरा अब केवल चिरमिरी तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसकी गूंज दूर-दूर तक फैल चुकी है। यही वजह है कि इस महाउत्सव में शामिल होने के लिए चिरमिरी के अलावा मनेंद्रगढ़, बैकुंठपुर और खड़गवां जैसे दूरदराज के क्षेत्रों से भी भारी संख्या में लोग खिंचे चले आ रहे हैं। हर कोने से पहुंचे हजारों गरबा प्रेमियों की उपस्थिति यह बताने के लिए काफी है कि यह आयोजन अब इस अंचल की संस्कृति और शान की सबसे बड़ी पहचान बन चुका है।
पहले दिन का अभूतपूर्व जनसैलाब और आने वाले दो दिनों के लिए ऐतिहासिक उम्मीदें महोत्सव के शुभारंभ के पहले ही दिन जिस अभूतपूर्व और अकल्पनीय भीड़ का सैलाब उमड़ा, उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दो दिनों (15 और 16 अक्टूबर) में यह आयोजन किस प्रकार सफलता के नए और स्वर्णिम इतिहास रचने वाला है। पारंपरिक और आधुनिक परिधानों में सजे-धजे युवाओं, महिलाओं और बच्चों के उत्साह ने इस गरबा नाइट को किसी बड़े महानगर के हाई-प्रोफाइल इवेंट से भी अधिक भव्य बना दिया है। शानदार लाइटिंग, बेहतरीन साउण्ड सिस्टम, मां अम्बे की भक्ति और डांडिया की खनक के बीच ‘पंखिड़ा सीजन 3’ ने चिरमिरी वासियों को एक ऐसा यादगार तोहफा दिया है, जिसकी चर्चा आने वाले लंबे समय तक पूरे छत्तीसगढ़ में होती रहेगी।




