पार्षदों और महापौर को कब तक दोष देंगे? एसईसीएल की पॉश कॉलोनी में शिक्षा और ओहदों का दिखावा, पर ₹60 बचाने की मानसिकता दे रही गंदगी को बढ़ावा!

चिरमिरी: एक तरफ नगर पालिक निगम चिरमिरी और एसईसीएल (SECL) प्रशासन शहर को साफ-सुथरा रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पढ़े-लिखे और संभ्रांत वर्ग की बस्तियों में फैली गंदगी शहर के माथे पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा रही है। मामला नगर पालिक निगम चिरमिरी के वार्ड क्रमांक 33 के अंतर्गत आने वाली एसईसीएल बी-टाइप कॉलोनी का है, जहां आधुनिक सुविधाओं के बीच फैली लापरवाही और नागरिकों की उदासीनता ने सिस्टम को भी हैरान कर दिया है।

400 घरों की इस पॉश कॉलोनी का कड़वा सच
बी-टाइप कॉलोनी में कुल 400 मकान हैं, जिनमें से लगभग 330 आवासों में परिवार निवास करते हैं। इस कॉलोनी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां रहने वाले अधिकांश लोग साधारण नागरिक नहीं, बल्कि समाज के प्रतिष्ठित और जिम्मेदार तबके से आते हैं। कॉलोनी में शिक्षक, कॉलरी बाबू, माइनिंग सरदार, ओवरमैन, पुलिस विभाग के कर्मी, पत्रकार और बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) कर्मचारी रहते हैं।

चूंकि यह क्षेत्र एसईसीएल और नगर पालिक निगम चिरमिरी दोनों के संयुक्त दायरे में आता है, इसलिए यहां साफ-सफाई, बिजली और पानी जैसी मूलभूत व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी दोनों एजेंसियां मिलकर उठाती हैं। निगम की ओर से ‘मिशन क्लीन सिटी’ के तहत स्वच्छता दीदियां रोज घर-घर कचरा उठाने के लिए पहुंचती हैं। इसके बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।

सामने दुर्गा पूजा का सबसे बड़ा त्यौहार, फिर भी बिखरा कचरा!
वर्तमान में चिरमिरी का सबसे बड़ा और पावन त्यौहार दुर्गा पूजा एकदम सामने आ रहा है। त्यौहार को देखते हुए नगर निगम और एसईसीएल प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारियों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करते हुए कॉलोनी परिसर और आसपास के क्षेत्रों में विशेष साफ-सफाई अभियान चलाकर सफाई करा दी थी।
लेकिन विडंबना देखिए कि सफाई के कुछ ही समय बाद यहां फिर से वही कचरा बिखरा हुआ नजर आने लगा है। दुर्गा पूजा के दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु और दर्शनार्थी पंडालों में घूमने और दर्शन करने आते हैं। जब बाहर से आने वाले लोगों की नजर बी-टाइप जैसी प्रतिष्ठित कॉलोनी में फैले इस कचरे पर पड़ेगी, तो यहां के निवासियों की साख और छवि पर क्या असर पड़ेगा, यह बात यहां के निवासी सोचने को तैयार ही नहीं हैं!
हर हफ्ते ट्रैक्टर लगाकर साफ करना पड़ता है कचरा
निगम और एसईसीएल द्वारा नियमित अंतराल पर ट्रैक्टर लगाकर सफाई कराई जाती है, लेकिन चंद दिनों में ही स्थिति फिर से वही हो जाती है। कॉलोनी के भीतर कई प्रमुख स्थल कचरा डंपिंग जोन बनते जा रहे हैं:
- दुर्गा पंडाल के पास (जहां पूजा के दौरान हजारों श्रद्धालुओं का आना-जाना होगा)
- पार्क के पास
- ब्लॉक क्रमांक 9 और 13 के बीच का हिस्सा
- ब्लॉक 8 और 7 के बीच वाली गली
इन जगहों पर बार-बार कचरे के ढेर लग जाते हैं, जिसे देखकर यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इस गंदगी का असली जिम्मेदार कौन है?
₹60 बचाने की जिद या गंदगी से समझौता?
हैरानी की बात यह है कि निगम द्वारा कचरा संग्रहण के एवज में मात्र ₹60 (साठ रुपये) का मामूली शुल्क तय किया गया है। लेकिन समाज के उच्च शिक्षित और संभ्रांत कहे जाने वाले कुछ लोग केवल इस मामूली राशि को बचाने के चक्कर में स्वच्छता दीदियों को कचरा देने से कतराते हैं। वे चुपचाप या तो गलियों में, या फिर पार्क और दुर्गा पंडाल के आसपास कचरा फेंकना बेहतर समझते हैं। साफ शब्दों में कहें तो, ये लोग सिर्फ ₹60 बचाने के लिए गंदगी के बीच जीना पसंद कर रहे हैं।
पार्षदों और महापौर को कब तक दोष देंगे?
इस पूरे घटनाक्रम में अक्सर लोग पार्षदों और महापौर को कोसते नजर आते हैं। लेकिन हकीकत यह है कि शहर में केवल एक ही कॉलोनी नहीं है। जनप्रतिनिधि हर गली और हर घर के दरवाजे पर पहरा देने नहीं बैठ सकते। जब दोनों एजेंसियां (निगम और एसईसीएल) अपना काम बखूबी कर रही हैं, तो अपनी नाकामी छुपाने के लिए जनप्रतिनिधियों को दोष देना सर्वथा गलत है। यदि जनता खुद जागरूक नहीं होगी, तो कोई भी पार्षद या महापौर इस स्थिति को सुधार नहीं सकता।
एक अपील: पॉश कॉलोनी के बाशिंदों को जागना होगा
यह समय एक-दूसरे पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि आत्ममंथन करने का है। जब कॉलोनी में शिक्षक, अधिकारी, कानून के रखवाले और बुद्धिजीवी वर्ग निवास करता है, तो समाज को दिशा देने की जिम्मेदारी भी सबसे पहले उन्हीं की बनती है।
दुर्गा पूजा जैसे महान पर्व के समय जब पूरा शहर मां भवानी की भक्ति और उत्सव के माहौल में डूबने की तैयारी कर रहा है, तब इस तरह कचरा फैलाकर अपने ही क्षेत्र को बदनाम करना बेहद दुखद है। आइए, अपनी इस आदत को बदलें, स्वच्छता दीदियों को नियमित रूप से कचरा दें, ₹60 की कंजूसी छोड़कर अपनी कॉलोनी को स्वच्छ बनाएं और चिरमिरी को एक आदर्श शहर का दर्जा दिलाने में अपना नागरिक धर्म निभाएं।
“स्वच्छता केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, हमारी नागरिक गरिमा का प्रतीक है। आइए, इस दुर्गा पूजा पर अपनी कॉलोनी को स्वच्छ और सुंदर बनाने का संकल्प लें!”




