छत्तीसगढ़टॉप न्यूज़लोकल न्यूज़

चिरमिरी निगम में बड़ा विवाद: MIC सदस्य मोती प्रधान पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप, बीजेपी पार्षद के विरोध के बावजूद SECL के मकान पर चल रही राशन दुकान

चिरमिरी निगम में बड़ा विवाद: MIC सदस्य मोती प्रधान पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप, बीजेपी पार्षद के विरोध के बावजूद SECL के मकान पर चल रही राशन दुकान

 

चिरमिरी, कोरिया (छत्तीसगढ़)। नगर पालिक निगम चिरमिरी में महापौर परिषद (MIC) की सदस्य और वार्ड क्रमांक 8 की पार्षद श्रीमती मोती प्रधान पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की दुकान के संचालन को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर ‘दोहरा लाभ’ लेने के साथ-साथ सत्ता के रुतबे का दुरुपयोग करते हुए मनमाने ढंग से SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) के मकान पर दुकान चलाने का आरोप है।

बीजेपी पार्षद ने किया था विरोध, फिर भी मनमानी जारी
यह विवाद तब गहरा गया जब यह सामने आया कि वार्ड क्रमांक 6 के स्थानीय बीजेपी पार्षद संदीप सोनवानी ने इस दुकान को वर्तमान स्थान पर संचालित करने का कड़ा विरोध किया था।
पार्षद सोनवानी और स्थानीय लोगों का आरोप है कि MIC सदस्य मोती प्रधान ने अपने उच्च पद का इस्तेमाल किया और राजनीतिक दबाव बनाकर, नियमों को ताक पर रखते हुए, SECL के एक आवास पर अवैध रूप से राशन की दुकान स्थापित कर ली।
> “मोती प्रधान एक पार्षद और MIC सदस्य हैं, जिनका काम जनता की सेवा करना है। इसके बावजूद, वह एक सरकारी योजना से लाभ कमा रही हैं और विरोध के बावजूद अपने पद के रुतबे का इस्तेमाल करके सरकारी संपत्ति पर दुकान चला रही हैं। यह न केवल हितों का टकराव है, बल्कि सत्ता का स्पष्ट दुरुपयोग भी है।” – स्थानीय सूत्र
>

हितों का टकराव और सरकारी संपत्ति का मनमाना उपयोग
मामला अब केवल एक जन प्रतिनिधि के PDS दुकान चलाने तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसमें सरकारी/अर्ध-सरकारी (SECL) संपत्ति का निजी लाभ के लिए उपयोग करने का मुद्दा भी जुड़ गया है, जो कई नैतिक और कानूनी सवाल खड़े करता है:
* जनप्रतिनिधि और लाभ का पद: निगम के महत्वपूर्ण पद पर होते हुए सरकारी राशन वितरण की एजेंसी चलाना लाभ के पद की श्रेणी में आता है।
* नियमों की अनदेखी: PDS की दुकान के लिए स्थान का चयन और आवंटन एक तय प्रक्रिया के तहत होता है, जिसे कथित तौर पर मोती प्रधान ने अपने रुतबे से दरकिनार किया।
* स्थानीय विरोध की उपेक्षा: वार्ड के स्थानीय पार्षद के विरोध को नजरअंदाज करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत माना जा रहा है।

जाँच और कार्रवाई की मांग तेज
इस पूरे मामले ने चिरमिरी नगर निगम की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। विपक्षी दल और जागरूक नागरिक समूह जिला प्रशासन और कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
* मांग: आरोपों की सच्चाई पता लगाने के लिए एक उच्च-स्तरीय जाँच समिति गठित की जाए।
* दोष सिद्ध होने पर: यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो MIC सदस्य की दुकान का आवंटन तत्काल रद्द किया जाए और नियमों के उल्लंघन के लिए कानूनी कार्रवाई की जाए।
इस संबंध में श्रीमती मोती प्रधान या चिरमिरी निगम के किसी अधिकारी का आधिकारिक वक्तव्य अभी सामने नहीं आया है। स्थानीय जनता की निगाहें अब जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मामले में क्या रुख अपनाता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!