छत्तीसगढ़

पनिका (साकत) समाज को ST वर्ग में शामिल करने की मांग तेज़; हल्दीबाड़ी से एसडीएम कार्यालय तक विशाल पदयात्रा

पनिका (साकत) समाज को ST वर्ग में शामिल करने की मांग तेज़; हल्दीबाड़ी से एसडीएम कार्यालय तक विशाल पदयात्रा


चिरमिरी, छत्तीसगढ़। पनिका (साकत) समाज ने खुद को एक बार फिर अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग में पुनः शामिल करने की अपनी पुरानी मांग को पुरजोर तरीके से उठाया है। इसी क्रम में, समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों को लेकर चिरमिरी अनुविभागीय अधिकारी (SDM) के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।

संगठन और विकास की लड़ाई के लिए पहल
इस कार्यक्रम को चिरमिरी में आयोजित करने का मुख्य उद्देश्य केवल ज्ञापन सौंपना नहीं था, बल्कि चिरमिरी क्षेत्र में समाज को संगठित करना और भविष्य में समाज के विकास की लड़ाई लड़ने के लिए एक मजबूत नींव तैयार करना था। यह आयोजन समाज में आपसी एकजुटता और चेतना जागृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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हल्दीबाड़ी से एसडीएम कार्यालय तक विशाल पदयात्रा
ज्ञापन सौंपने से पहले, पनिका समाज ने अपनी एकजुटता प्रदर्शित करते हुए विशाल पदयात्रा का आयोजन किया। यह कार्यक्रम हल्दीबाड़ी कालीबाड़ी के पास से शुरू हुआ, जहाँ से समाज के सदस्य बड़ाबाजार होते हुए एसडीएम कार्यालय चिरमिरी तक मार्च किए।
इस प्रदर्शन में महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठजनों के साथ सैकड़ों की संख्या में युवाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया, जो इस मांग के प्रति समाज की व्यापक सहमति और पीढ़ीगत समर्थन को दर्शाता है।

युवा नेतृत्व का महत्वपूर्ण योगदान
इस सफल आयोजन और पदयात्रा में युवा वर्ग का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहा। कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से संदीप सनी सोनवानी, शंकर पनिका, संतोष पड़वार, विनोद राउर, राजू चिकंजुरी, मनोज बघेल, बाबा बघेल, दीपक राउर, दीपक काशी, रोहित सोनवानी, पिंटू सोनवानी, राजू, जी एन देवांगन चिंपू दास , दुर्गा दास के साथ चिरमिरी पनिका समाज के समस्त युवाओं का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

ऐतिहासिक विसंगति पर मुख्य ज़ोर
ज्ञापन में पनिका समाज ने तर्क दिया है कि उन्हें अविभाजित मध्य प्रदेश में सन 1971 से पहले अनुसूचित जनजाति वर्ग में शामिल किया गया था। समाज का आरोप है कि बिना किसी सुनवाई या पक्ष जाने, उन्हें 1971 में प्रकाशित सूची से हटाकर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की श्रेणी में डाल दिया गया, जिससे उनका विकास बाधित हुआ है।

संघर्ष जारी, बड़े आंदोलन की चेतावनी
पनिका समाज लंबे समय से इस मांग को लेकर प्रदेशभर में एकजुटता प्रदर्शित कर रहा है। उपस्थित पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं होती है, तो वे एक बड़े और व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
समाज ने SDM से अनुरोध किया है कि ज्ञापन को यथाशीघ्र महामहिम राष्ट्रपति तक पहुंचाया जाए, ताकि संवैधानिक रूप से इस ऐतिहासिक विसंगति को दूर किया जा सके और पनिका समाज को उनका मूल अधिकार वापस मिल सके।

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