सफाई के अभाव में बद से बदतर हो रही है गोदरीपारा क्षेत्र में कॉलोनी
पूरे बी टाइप कॉलोनी के सड़कों में बिखरा पड़ा हुआ है कचरा


चिरमिरी। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में स्वच्छता को सर्वोपरी मानते हुए देश में स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत करवाई जिसमें बड़े शहरों से लेकर छोटे से छोटे शहरों को शामिल कर उनके स्वच्छता के आधार पर वरीयता प्रदान कर प्रथम द्वितीय को पुरस्कार वितरण दिया जाने लगा इसी क्रम में चिरमिरी नगर निगम दो से तीन बार छोटे शहरों में प्रथम द्वितीय पुरस्कार दिल्ली में प्राप्त कर चुके है जिसका चिरमिरी वालों ने अपने आप में गर्व महसूस किया लेकिन अगर सच्चाई में देखा जाए तो स्वच्छ भारत अभियान में सर्वे किसी खेल से ज्यादा नहीं लगता और जो भी सर्वे टीम आती होगी या तो उन्हें किसी खास जगहों में ले जाया जाता होगा या किसी ना किसी प्रकार का लाभ दिया जाता होगा क्योंकि कालोनियों की स्थिति देख कर नहीं लगता है कि स्वच्छता सर्वेक्षण में एक भी अंक प्राप्त होगा ऐसा इसलिए क्योंकि चिरमिरी नगर पालिक निगम क्षेत्र लगभग एसईसीएल के कालोनियों से भरा पड़ा हुआ है जहां सड़क पर चारों तरफ गंदगी फैली नजर आती है जबकि शहर की कालोनियों की सफाई की जिम्मेदारी एसईसीएल एवं निगम दोनों अलग अलग कार्य करते हैं निगम प्रत्येक वार्ड में कर्मचारी लगा कर रखा है वहीं एसईसीएल गार्बेज का करोड़ो का ठेका दे चुका है जहां दोनों एजेंसी मिल कर साफ सफाई नहीं कर पा रहे हैं जिससे आने वालों बरसात में क्या स्थिति बनेगी इसका भगवान ही मालिक है।
इस स्थिति में खास कर गोदरीपारा के बी टाइप कॉलोनी की होगी यहां बीच कॉलोनी के पार्क के सामने सड़कों पर कचरा ऐसा फैला है कि यहां से पैदल चलने वालों को किस कदर परेशानी का सामना करना पड़ता है जिसे पैदल चलने वाला ही समझ सकता है जबकि कॉलोनी से मंदिर जाने का एक मात्र रास्ता यही है । निकाय चुनाव में बी टाइप के बाहर कॉलोनी से पार्षद चुने जाने के कारण यहां पार्षद द्वारा ध्यान ना देना गंदगी होना लाज़मी है जबकि निगम द्वारा एक कर्मी पिछले 20 वर्षों से प्रतिदिन कॉलोनी की सफाई में लगा रहता था जिससे कॉलोनी में साफ सफाई हो जाया करती है लेकिन सूत्रों की माने तो पार्षद के पुत्र के द्वारा पार्षद का कार्य संभाला जा रहा जो सफाई कर्मी को सीधे अपने मोटर साइकल में बैठा कर केवल अपने घर के पास ओर अपने साथियों के घर के पास प्रतिदिन झाड़ू लगवाया जाता है जबकि बी टाइप कॉलोनी में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के पास प्रतिदिन लोगों का आना जाना लगा रहता है वहां की गंदगी देख लोग बैंक के अंदर ही रहना पसंद करते है जबकि सार्वजनिक स्थानों में रोज झाड़ू लगाया जाना चाहिए लेकिन पता नहीं शायद सत्ता के पार्षद को कॉलोनी से कम वोट मिला या किसी प्रकार की दुश्मनी है जिससे कारण यहां लोगों को गंदगी में रहने पर मजबूर होना पड़ रहा है ऐसा हम इसलिए लिख रहे है क्योंकि पार्षद अपने फेसबुक पर अपने घर के आस पास सफाई करवाने की तस्वीर साझा करती हैं जिससे हम बी टाइप से नाराज़ होने की बात बोल रहे हैं ।





