छत्तीसगढ़

अंग्रेजी माध्यम पढ़ हिंदी माध्यम की पढ़ाई करने को मजबूर हल्दीबाड़ी मिडिल स्कूल के बच्चे

अंग्रेजी माध्यम पढ़ हिंदी माध्यम की पढ़ाई करने को मजबूर हल्दीबाड़ी मिडिल स्कूल के बच्चे

स्कूल की दिवाल पर लिखे शब्द

एमसीबी/चिरमिरी । नगर पालिक निगम के हृदय स्थल हल्दीबाड़ी स्थित सरकारी स्कूल में एक अलग ही तरह के नियम के तहत बच्चों को शिक्षा प्रदान की जा रही है जहां 2018 से पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को सीबीएसई की अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा दी जा रही है वहीं उसी परिसर में चल रही हाई स्कूल एवं हॉयर सेकेंड्री के बच्चों को हिंदी माध्यम की शिक्षा प्रदान की जा रही हैं जहां सरकारी स्कूलों में एक तरह सरकार उन बच्चों को निःशुल्क शिक्षण प्रदान करती हैं जो आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े वर्ग से होते हैं ऐसे बच्चे आठवीं तक तो ठीक ठाक अंग्रेजी माध्यम से पास कर लेते हैं वहीं नवमी कक्षा से पूरे चिरमिरी में आत्मानंद स्कूल को छोड़ दिया जाए तो कहीं भी इन बच्चों को आर्थिक स्थिति से कमजोर होने के कारण प्रवेश प्राप्त नहीं होता है वहीं आत्मानंद स्कूल में प्रवेश के लिए लॉटरी पद्धति से गुजरना पड़ता है जहां किस्मत से किसी बच्चों का प्रवेश हो गया तो ठीक है नहीं तो बाकी बच्चों को हिंदी माध्यम में प्रवेश लेने को मजबूर होना पड़ता है हल्दीबाड़ी में जहां मुख्य अध्ययन संस्थान शासकीय विद्यालय है वहीं इसके पोशाक स्कूल मोहन नगर एवं सड़क दफाई प्राथमिक विद्यालय जो कि हिंदी माध्यम है जहां के बच्चों को भी मिडिल स्कूल में प्रवेश कर मजबूरी में सीबीएसई का अंग्रेजी माध्यम से पढ़ना पड़ता है जिसको बच्चे आसानी से ग्रहण नहीं कर पाते मजबूरन अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ना पड़ता है ।


अपने तरह का ऐसा स्कूल मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर जिले में अकेला है जहां बच्चों का भविष्य अंधकार मय नजर आता है । स्कूल में पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों की मानें तो सीबीएसई के अन्य स्कूलों की पढ़ाई जहां आधी हो जाती वहां इस स्कूल में किताबें सरकार के द्वारा भेजी जाती है यहां तक कि जानकारी प्राप्त हुई है कि स्कूल के परीक्षा में पेपर भी स्कूल के शिक्षकों के द्वारा बनाई और छपाई जाती है ना ब्लॉक और ना जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से छप कर आती है बड़ी विडंबना यह है कि जहां सरकार एक ओर गरीब एवं पिछड़े वर्ग के बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर काबिल बनाने का सपना देखती है वहीं आधी अधूरी शिक्षा नीति के कारण बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी करती है । वहीं बच्चों के अभिभावकों ने पेरेंट्स मीटिंग 2022 में ही प्रस्ताव लाया था कि या तो संपूर्ण स्कूल को ही अंग्रेजी माध्यम कर दें या अंग्रेजी माध्यम को बंद कर दें इसके लिए कई बार ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को स्कूल प्रबंधन द्वारा मांग किया जा चुका है लेकिन वाह रे सरकार के कर्मचारी इन्हें बच्चों के भविष्य से कोई लेना देना नहीं बस अपना वेतन ले कर चुप चाप कुर्सी तोड़ रहे हैं ।
सरकार की नियत तो बच्चों के भविष्य बनाना एवं संवारना हैं लेकिन सरकारी तंत्र उस नीति एवं नियत को पूरी तरह बर्बाद करना ही देखा जा सकता है।

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