चिरमिरी: ओवी ब्लास्टिंग में बड़ी चूक, समय से पहले धमाके में कई महिला मजदूर और कर्मचारी घायल
बड़ा हादसा टला....

चिरमिरी: ओवी ब्लास्टिंग में बड़ी चूक, समय से पहले धमाके में कई महिला मजदूर और कर्मचारी घायल

चिरमिरी, छत्तीसगढ़: एसईसीएल (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) चिरमिरी क्षेत्र की एक ओपन कास्ट कोयला खदान में मंगलवार को एक बड़ी लापरवाही सामने आई, जहाँ निर्धारित समय से पहले ओवी (ओवरबर्डन) ब्लास्टिंग हो जाने से कई महिला मजदूर एवं कर्मचारी घायल हो गए। प्रारंभिक सूचना के अनुसार, घायलों में कई महिलाएं शामिल हैं जो ब्लास्टिंग स्थल के पास काम कर रही थीं।


क्या हुआ हादसा?

मिली जानकारी के मुताबिक, खदान में ओवी (ऊपरी मिट्टी) हटाने के लिए रूटीन ब्लास्टिंग की तैयारी चल रही थी। बताया जा रहा है कि ब्लास्टिंग के लिए तय समय से कुछ मिनट पहले ही धमाका हो गया। इस अचानक हुए धमाके के कारण, ब्लास्टिंग क्षेत्र से पर्याप्त दूरी पर नहीं हट पाए कई कर्मचारी, खासकर महिला मजदूर, पत्थरों और मलबे की चपेट में आ गए।

घायलों की स्थिति और उपचार
हादसे में घायल हुए सभी मजदूरों और कर्मचारियों को तत्काल खदान परिसर से निकालकर स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। घायलों में कुछ को गंभीर चोटें आई हैं, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल रेफर किया जा सकता है। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि ब्लास्टिंग की चेतावनी और निकासी प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही धमाका हो गया, जिससे भगदड़ मच गई और लोग सुरक्षित जगह नहीं पहुँच पाए।
प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप
इस घटना के बाद खदान क्षेत्र में तनाव का माहौल है। मजदूरों और उनके परिजनों ने एसईसीएल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ब्लास्टिंग के सुरक्षा मानकों और प्रोटोकॉल का ठीक से पालन नहीं किया गया। मजदूर यूनियनों ने इस मामले की उच्च-स्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुँच गए हैं और घटना की जाँच शुरू कर दी गई है। एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारी भी अस्पताल पहुँचकर घायलों का हालचाल ले रहे हैं।
सुरक्षा नियमों पर उठते सवाल
यह घटना एक बार फिर कोयला खदानों में ब्लास्टिंग के दौरान अपनाई जाने वाली सुरक्षा प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मजदूर सुरक्षा संगठनों का कहना है कि अक्सर उत्पादन लक्ष्य हासिल करने की जल्दबाजी में सुरक्षा मानकों को दरकिनार कर दिया जाता है, जिसका खामियाजा मजदूरों को भुगतना पड़ता है।
आगे की विस्तृत जानकारी और कंपनी प्रबंधन की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
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