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महा-कार्रवाई: मंत्री के गृह ग्राम रतनपुर में वन भूमि पर चला बुलडोजर

बाहरी कब्ज़ाधारियों पर बैगा समुदाय का बड़ा खुलासा

महा-कार्रवाई: मंत्री के गृह ग्राम रतनपुर में वन भूमि पर चला बुलडोजर; बाहरी कब्ज़ाधारियों पर बैगा समुदाय का बड़ा खुलासा

वन विभाग ने ग्राम रतनपुर में अवैध कब्ज़े के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कई निर्माणों को ध्वस्त कर दिया। स्थानीय सरपंच और बैगा समुदाय ने आरोप लगाया है कि सभी कब्ज़ा धारी गांव के बाहर के हैं, न ही यहां के निवासी हैं और न ही वोटर, लेकिन पिछले 2-3 वर्षों से धीरे-धीरे अतिक्रमण कर रहे थे।

रतनपुर (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर):
वन विभाग की संरक्षित ज़मीन पर लंबे समय से चल रहे अतिक्रमण को समाप्त करने के लिए सोमवार को रतनपुर गांव में एक विशाल अभियान चलाया गया। विभाग ने अपनी ज़मीन को मुक्त कराने के लिए अवैध रूप से निर्मित पक्के और कच्चे ढांचों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
यह घटना इसलिए भी सुर्खियों में है क्योंकि रतनपुर, स्थानीय विधायक और वर्तमान मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का गृह ग्राम है, जिसे लेकर विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने मंत्री के खिलाफ विरोध जताना शुरू कर दिया है।

बैगा समुदाय और सरपंच का संयुक्त मोर्चा: ‘ये न निवासी, न वोटर, 2-3 साल से कर रहे थे कब्ज़ा’
कार्रवाई के दौरान, स्थानीय बैगा आदिवासी समुदाय के लोगों ने वन विभाग का खुलकर समर्थन किया। बैगा समुदाय के प्रतिनिधि और स्थानीय सरपंच ने अवैध कब्ज़ा धारियों की पहचान को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए और संयुक्त रूप से यह आरोप लगाया कि अतिक्रमण करने वाले लोग रतनपुर के मूल निवासी नहीं हैं, बल्कि बाहरी हैं।
> बैगा समुदाय का वक्तव्य: “ये सभी अवैध कब्ज़ा धारी हमारे गांव के लोग नहीं हैं। न ही ये यहां के वोटर हैं और न ही हमारे गांव के स्थायी निवासी। ये लोग पिछले दो से तीन वर्ष से धीरे-धीरे आकर वन भूमि पर अपना मकान बना रहे थे। हम चुप थे, क्योंकि हमें पता था कि विभाग कार्रवाई करेगा।”

स्थानीय लोगों के अनुसार, बाहरी लोगों के इस अतिक्रमण से गांव का शांत माहौल खराब हो रहा था और बैगा आदिवासियों की पारंपरिक वन भूमि को नुकसान पहुँच रहा था।

बार-बार नोटिस, फिर भी जारी रहा निर्माण
वन विभाग के अधिकारियों ने पुष्टि की कि उन्होंने इन अवैध निर्माणों को रोकने के लिए कई बार कानूनी नोटिस जारी किए थे।

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वन परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) ने बताया, “विभाग की ओर से इन कब्ज़ा धारियों को अवैध निर्माण रोकने के लिए कई बार नोटिस दिए गए थे। नोटिस का जवाब न देने और निर्माण कार्य बंद न करने पर, कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए हमें यह विध्वंस कार्रवाई करनी पड़ी।” उन्होंने कहा कि कब्ज़ा धारियों ने जानबूझकर विभाग के निर्देशों की अवहेलना की।

अनियमितताएं और सरकारी योजना का दुरुपयोग
विध्वंस कार्रवाई के दौरान कई सरकारी अनियमितताएं भी सामने आईं:
* सरकारी आवास योजना का दुरुपयोग: एक अवैध कब्ज़ा धारी जिसे मूल रूप से खड़गवां क्षेत्र में पीएम आवास योजना के तहत लाभ मिलना था, उसने मकान रतनपुर की वन भूमि पर बना लिया, जो सरकारी नियमों का गंभीर उल्लंघन है।
* भू-माफिया की भूमिका: एक व्यक्ति पर सक्रिय रूप से ज़मीन पर कब्ज़ा करके लोगों को बेचने का आरोप है।
* अन्य कब्ज़ा धारी: यह भी सामने आया है कि सुलेमान नामक व्यक्ति का कोंडागी गांव में पहले से ही पक्का मकान मौजूद है, और सूरजपुर के एक व्यक्ति ने भी रतनपुर में कब्ज़ा किया था।

राजनीतिक विरोध: कांग्रेस ने घेरा मंत्री को
विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि मंत्री के गृह ग्राम में इतना बड़ा अवैध कब्ज़ा होना, स्थानीय प्रशासन, राजस्व विभाग और वन विभाग की संयुक्त लापरवाही को दर्शाता है।

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कार्रवाई के बाद की स्थिति
अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने की यह विशाल कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई। मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल और वन विभाग के अमले ने सुनिश्चित किया कि कोई अप्रिय घटना न हो।
वन विभाग के अधिकारियों ने ध्वस्त की गई ज़मीन को अपने कब्ज़े में ले लिया है और तुरंत यहाँ तारबंदी (fencing) का काम शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं ताकि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण न हो सके।
कब्ज़ा धारियों पर अवैध अतिक्रमण और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के तहत कानूनी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। विभाग ने साफ किया है कि इस तरह के अतिक्रमण के लिए ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।
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