छत्तीसगढ़

मासूमों की जान दांव पर: चिरमिरी में स्कूली वैनों में ओवरलोडिंग का ‘खतरनाक खेल’— सुरक्षा के अनिवार्य नियम पीला रंग और विशेष बैच लाइसेंस भी नदारद!

मासूमों की जान दांव पर: चिरमिरी में स्कूली वैनों में ओवरलोडिंग का ‘खतरनाक खेल’— सुरक्षा के अनिवार्य नियम पीला रंग और विशेष बैच लाइसेंस भी नदारद!


चिरमिरी, छत्तीसगढ़: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा सुप्रीम कोर्ट द्वारा बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए कड़े नियमों की चिरमिरी में खुलेआम अवहेलना हो रही है। डीएवी स्कूल, स्वामी आत्मानंद स्कूल, केंद्रीय विद्यालय सहित शहर के कई प्रतिष्ठित स्कूलों के बच्चों को रोज सुबह और शाम मारुति वैन, स्कॉर्पियो, ईको और बोलेरो जैसे निजी वाहनों में ठूंस-ठूंस कर ढोया जा रहा है। क्षमता से कई गुना अधिक बच्चों को भरकर ले जाया जा रहा है, जो किसी भी समय एक बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकता है।
सुरक्षा मानकों की धज्जियां: पीला रंग और विशेष लाइसेंस अनिवार्य
देश भर में स्कूली वाहनों के लिए अनिवार्य दो सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण नियमों की चिरमिरी की सड़कों पर सबसे अधिक अनदेखी की जा रही है:
* पीला रंग (Golden Yellow): नियम के अनुसार, बच्चों को ढोने वाले वाहन का रंग स्पष्ट रूप से पीला होना चाहिए, ताकि उसे दूर से ही पहचान कर प्राथमिकता दी जा सके। लेकिन चिरमिरी में दौड़ रहे अधिकांश वैन, स्कॉर्पियो और ईको सफेद, भूरे या अन्य निजी रंगों के हैं।


* बैच लाइसेंस (Special Badge/Endorsement): स्कूली बच्चों के वाहन चालकों के लिए न केवल वैध परिवहन ड्राइविंग लाइसेंस (Transport License) होना अनिवार्य है, बल्कि उनके लाइसेंस पर बच्चों के परिवहन के लिए एक विशेष ‘बैच’ या पृष्ठांकन (Endorsement) भी होना चाहिए। यह विशेष बैच सुनिश्चित करता है कि चालक का ट्रैक रिकॉर्ड साफ है और वह कम से कम 5 साल के अनुभव के साथ प्रशिक्षित है।
> नियमों का उल्लंघन: सड़कों पर दौड़ रहे ये निजी वाहन (जो अक्सर कमर्शियल परमिट वाले भी नहीं होते) न केवल ओवरलोड हैं, बल्कि इनमें से अधिकांश में सुरक्षा के अनिवार्य मानक जैसे फर्स्ट-एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र और आपातकालीन द्वार भी गायब हैं।
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डीएवी, स्वामी आत्मानंद और केंद्रीय विद्यालय पर सवाल
सबसे अधिक चिंताजनक बात यह है कि ये असुरक्षित वाहन शहर के प्रमुख और बड़े शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े हुए हैं। सवाल यह उठता है कि:
* स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी: क्या स्कूल प्रबंधन इन अनधिकृत वाहनों की स्थिति, रंग, और ड्राइवरों के लाइसेंस की जाँच क्यों नहीं कर रहा है? नियमतः स्कूल की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि बच्चों का परिवहन सुरक्षित साधनों से हो।


* आरटीओ/परिवहन विभाग का मौन: स्थानीय परिवहन विभाग (RTO) की ओर से इन नियमों के खुले उल्लंघन पर कोई ठोस कार्रवाई या नियमित जांच अभियान क्यों नहीं चलाया जा रहा है? सड़क पर खुलेआम घूम रहे इन खतरनाक, गैर-पीले और बैच-रहित चालकों वाले वाहनों को देखकर भी अधिकारी क्यों आँखें मूंदे हुए हैं?
बड़ी दुर्घटना की आशंका और जवाबदेही
ओवरलोडिंग, गैर-पीले रंग के वाहन और गैर-मान्यता प्राप्त ड्राइवर, ये सभी कारक मिलकर किसी भी वक्त एक गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। ऐसी स्थिति में, क्षमता से अधिक बच्चों के होने के कारण जानमाल का बड़ा नुकसान होने की आशंका है।
यदि कल कोई बड़ी दुर्घटना होती है, तो इन मासूम बच्चों की सुरक्षा की जवाबदेही तीन प्रमुख पक्षों की होगी:
* स्कूल प्रबंधन: जिसने नियमों के उल्लंघन को जानते हुए भी अनधिकृत वाहनों को परिसर में आने की अनुमति दी।
* परिवहन विभाग (RTO): जो नियमों का प्रवर्तन करने में पूरी तरह विफल रहा है।
* वाहन चालक/मालिक: जो चंद पैसों के लिए बच्चों की जान जोखिम में डाल रहे हैं।

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