पोड़ी और हुंडिका जलाशय: 47 साल का इंतजार, कागजों में बहती नहरें और व्यवस्था की उदासीनता से जूझते अन्नदाता

पोड़ी और हुंडिका जलाशय: 47 साल का इंतजार, कागजों में बहती नहरें और व्यवस्था की उदासीनता से जूझते अन्नदाता

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के अंतर्गत बैकुंठपुर विकासखंड के ग्रामीण अंचलों से जो तस्वीर सामने आती है, वह देश के अन्नदाता के साथ हो रहे क्रूर मज़ाक की एक ऐसी बानगी है जो झकझोर कर रख देती है। एक ओर सरकारें कागजों और विज्ञापनों में विकास के बड़े-बड़े दावे करती हैं, तो दूसरी ओर कोरिया जिले के पोड़ी और हुंडिका जैसे जलाशय इस बात के जीवंत प्रमाण हैं कि किस तरह सरकारी फाइलों के फेर में किसानों के सपने और उनका भविष्य दम तोड़ रहा है।

ग्राम पंचायत पोड़ी में किसानों को खेती-किसानी के लिए सिंचाई का पर्याप्त पानी मिले और वे आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन सकें, इसी नेक उद्देश्य से वर्ष 1979 में पोड़ी जलाशय का निर्माण कराया गया था। इस बांध को बने हुए पूरे 47 साल बीत चुके हैं, लेकिन इन चार दशकों से अधिक के लंबे अंतराल में आज तक नहरों के जरिए किसानों के खेतों तक पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंच पाई है। ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2016-17 में जल संसाधन विभाग से नहर निर्माण कार्य के लिए लगभग 55 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन यह राशि कहां और कैसे खर्च हुई, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। गंभीर आरोप यह है कि नहर निर्माण का यह पूरा काम सिर्फ कागजों पर ही पूरा दिखा दिया गया, जबकि धरातल पर कोई काम नहीं हुआ और नहरें आज भी जर्जर, अधूरी और टूटी-फूटी हालत में कोरिया जिले के किसानों की लाचारी पर आंसू बहा रही हैं।
किसानों का दर्द सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। इस गंभीर समस्या को लेकर अन्नदाताओं ने स्थानीय विधायक से लेकर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तक कई बार गुहार लगाई, अधिकारियों की चौखट पर माथा टेका, लेकिन हर बार उन्हें कोरे आश्वासनों के सिवा कुछ नहीं मिला। हालात तब और ज्यादा बदतर हो जाते हैं जब हुंडिका जलाशय की सच्चाई सामने आती है। वर्ष 2016-17 में ही हुंडिका जलाशय के नाम से एक और जल संरचना का निर्माण हुआ था, जिसमें 760 हेक्टेयर भूमि सिंचित होने का बड़ा दावा किया गया था, लेकिन हकीकत यह है कि इस जलाशय से भी एक हेक्टेयर जमीन को भी पानी नसीब नहीं हो पाया। इसके बाद इसी साल 6 अप्रैल 2026 को राज्य शासन द्वारा कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड के अंतर्गत हुंडिका जलाशय योजना के विस्तार कार्य के लिए 1649.59 लाख यानी सोलह करोड़ उनचास लाख उनसठ हजार रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई। इस परियोजना का उद्देश्य था कि जलाशय के विस्तार के माध्यम से रूपांकित 760 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता की कमी को दूर करते हुए लगभग 689 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा सुनिश्चित की जाए, जिससे कोरिया जिले के किसानों को सीधा लाभ मिले। लेकिन इस बड़ी स्वीकृति को बीते लगभग 7 महीने गुजर जाने के बावजूद धरातल पर नहर का निर्माण कार्य आज तक शुरू नहीं किया गया है।

इस पूरी व्यवस्था में सबसे बड़ा विडंबनापूर्ण और हृदयविदारक पहलू यह है कि जिन किसानों की उपजाऊ जमीनें नहर निर्माण के लिए प्रशासन द्वारा अधिग्रहित की गई थीं, आज उन्हीं की जमीनों पर पानी न पहुंचने के कारण वे मजबूर होकर सूखी पड़ी नहरों में ही खेती करने को विवश हैं। किसानों का साफ कहना है कि यदि पोड़ी और हुंडिका दोनों जलाशयों की नहरों को पूरी ईमानदारी और योजनाबद्ध तरीके से बना दिया जाए, तो सैकड़ों एकड़ जमीन पर साल में दोहरी फसलें ली जा सकती हैं और क्षेत्र का किसान वाकई आत्मनिर्भर बन सकता है। परंतु, विभागों की गहरी उदासीनता और प्रशासनिक सुस्ती के कारण करोड़ों रुपए की लागत से बने ये जलाशय आज पूरी तरह अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। अब कोरिया जिले के अन्नदाताओं के सब्र का बांध टूट चुका है और वे इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने तथा जल्द से जल्द नहरों का निर्माण पूरा कर खेतों तक पानी पहुंचाने की पुरजोर मांग कर रहे हैं।




