मौत के छत्तों के साये में जीने को मजबूर गोदरीपारा के रहवासी, प्रशासन और SECL की चुप्पी तोड़ रही है सब्र का बांध

मौत के छत्तों के साये में जीने को मजबूर गोदरीपारा के रहवासी, प्रशासन और SECL की चुप्पी तोड़ रही है सब्र का बांध
चिरमिरी, [12 मार्च 2026]:
कोयला नगरी चिरमिरी का बी-टाइप गोदरीपारा इलाका इन दिनों किसी बड़े हादसे के इंतजार में खड़ा नजर आ रहा है। यहाँ की तीन मंजिला इमारतों की कॉलोनियों में आदमखोर मधुमक्खियों ने अपना डेरा जमा लिया है। विडंबना यह है कि एक महिला की जान जाने के बावजूद नगर निगम प्रशासन और SECL (एसईसीएल) प्रबंधन गहरी नींद में सोया हुआ है।
खंडहर बन चुके मकानों में ‘मौत का डेरा’
गोदरीपारा स्थित बी-टाइप क्वार्टर, जिनमें से कई अब बंद या जर्जर अवस्था में हैं, मधुमक्खियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन गए हैं। बिल्डिंगों की छतों और छज्जों पर लटके बड़े-बड़े छत्ते न केवल दहशत पैदा कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय लोगों की जान के दुश्मन बने हुए हैं। स्थिति इतनी भयावह है कि अब छत्तों की संख्या पहले से कहीं अधिक हो गई है।
पुरानी घटना से भी नहीं लिया सबक
स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि कुछ साल पहले इसी कॉलोनी में मधुमक्खियों के हमले से एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई थी। उस समय प्रशासन ने बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन हकीकत यह है कि आज तक एक भी छत्ता हटाने की जहमत नहीं उठाई गई।
दहशत में बच्चे और बुजुर्ग
स्कूल जाने वाले छोटे बच्चे हों, दूध लेने जाने वाली महिलाएं या शाम को टहलने वाले बुजुर्ग—हर कोई सिर झुकाकर और डरते हुए इन रास्तों से गुजरता है।
- स्थानीय निवासी का कहना है: “हल्की सी आहट या धुआं होने पर मधुमक्खियां हमलावर हो जाती हैं। हम अपने ही घर में कैद रहने को मजबूर हैं।”
प्रशासनिक उदासीनता की पराकाष्ठा
क्षेत्र की इस समस्या पर न तो निगम प्रशासन कोई ठोस कदम उठा रहा है और न ही SECL प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी समझ रहा है। बंद पड़े मकानों का रखरखाव न होना और उन पर लगे छत्तों को नजरअंदाज करना सीधे तौर पर आम जनमानस की जान से खिलवाड़ है।
हमारा सवाल: क्या प्रशासन किसी और बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? क्या एक और जान जाने के बाद ही ये कुंभकर्णी नींद टूटेगी?


