चिरमिरी में गहराया जल संकट: अपनों के ही खिलाफ सड़क पर उतरने को तैयार भाजपा नेता

चिरमिरी में गहराया जल संकट: अपनों के ही खिलाफ सड़क पर उतरने को तैयार भाजपा नेता
चिरमिरी। कोयलांचल नगरी चिरमिरी में पानी की एक-एक बूंद के लिए मचे घमासान ने अब राजनीतिक युद्ध का रूप ले लिया है। बड़ा बाजार स्थित पानी टंकी से गोदरीपारा क्षेत्र में पाइपलाइन के जरिए जल आपूर्ति करने के प्रस्ताव ने शहर को दो गुटों में बांट दिया है। जहां एक ओर बड़ा बाजार के निवासी किसी भी कीमत पर अपने क्षेत्र का पानी बाहर न जाने देने के संकल्प पर अडिग हैं, वहीं दूसरी ओर गोदरीपारा के सात वार्डों की जनता ने अब ‘आर-पार’ की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है।
राधाकृष्ण मंदिर में उमड़ा जनसैलाब, सत्ता पक्ष के सुर बदले

बीते दिनों बड़ा बाजार के निवासियों द्वारा पानी देने के विरोध में की गई बैठक के जवाब में गोदरीपारा क्षेत्र के सातों पार्षदों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राधाकृष्ण मंदिर प्रांगण में एक विशाल आम सभा आयोजित की। इस सभा में कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दलों के पार्षद एक मंच पर नजर आए। सबसे हैरान करने वाली स्थिति सत्ताधारी दल भाजपा के उन कद्दावर नेताओं की रही, जो महज एक दिन पहले ही मंडल स्तरीय प्रशिक्षण शिविर से ‘अनुशासन’ का पाठ पढ़कर लौटे थे। जनभावनाओं के दबाव में ये नेता अपनी ही ‘ट्रिपल इंजन’ सरकार के खिलाफ मुखर नजर आए। मंच से सीधे तौर पर कलेक्ट्रेट का घेराव करने और चिरमिरी के मुख्य मार्ग पर हजारों की संख्या में चक्का जाम करने का आह्वान किया गया, जो क्षेत्र में सरकार के प्रति बढ़ते असंतोष को साफ दर्शाता है।
मंत्री के घर के घेराव की गूंज: “कलेक्टर के पास क्यों जाएं?”
आम सभा में मौजूद अधिवक्ता अशोक ने जनता के बीच बेहद कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने सीधे क्षेत्रीय विधायक और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को निशाने पर लेते हुए कहा कि “हमने उन्हें चुनकर मंत्री बनाया है, समस्याओं के समाधान के लिए हम कलेक्टर के पास क्यों जाएं? हमें सीधे मंत्री के बंगले का घेराव करना चाहिए।” इस बयान ने प्रशासनिक गलियारों और राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है। स्थानीय लोगों का आक्रोश इस बात पर है कि क्षेत्र में करोड़ों की लागत से पाइपलाइन तो बिछाई गई, लेकिन आज तक नलों से पानी की एक बूंद नहीं टपकी।

पार्षदों की भूमिका और ‘एक व्यक्ति’ का खौफ
हैरानी की बात यह है कि गोदरीपारा के इन सात वार्डों का प्रतिनिधित्व करने वाले पार्षदों में से चार ऐसे हैं जो दूसरी बार चुनकर आए हैं और प्रशासनिक कार्यों की गहरी समझ रखते हैं। इसके बावजूद, चर्चा यह रही कि बड़ा बाजार के ‘एक व्यक्ति’ के विरोध के कारण सात पार्षदों की ताकत बौनी साबित हो रही है। जब हमारे संवाददाता ने पार्षदों से सवाल किया कि वे अपनी ‘पार्षद निधि’ से नई टंकी का निर्माण क्यों नहीं कराते, तो उन्होंने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि अभी शासन से मांग की जा रही है, यदि भविष्य में जरूरत पड़ी तो निधि देने पर विचार करेंगे। जनता के बीच जाकर अपनी व्यथा सुनाने को विपक्षी खेमा पार्षदों की कमजोरी के रूप में देख रहा है।
अमृत मिशन और दावों के बीच फंसी जनता
इधर, सत्ताधारी दल के नेताओं का तर्क है कि 185 करोड़ रुपये की ‘अमृत जल मिशन’ योजना आने वाली है, जिसे पूर्ण होने में लगभग पांच वर्ष का समय लगेगा। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्री स्वयं जल्द पानी उपलब्ध कराने का दावा कर रहे हैं। दूसरी ओर, बड़ा बाजार के निवासियों का तर्क है कि उनकी पानी टंकी केवल दो वार्डों की क्षमता के अनुसार बनी है, ऐसे में सात अन्य वार्डों को वहां से जोड़ना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से गलत है।
फिलहाल, चिरमिरी का यह जल विवाद अब केवल पानी की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह साख की लड़ाई बन चुका है। आने वाले दिनों में यदि समाधान नहीं निकला, तो चिरमिरी की सड़कों पर बड़ा जन-आंदोलन देखने को मिल सकता है।




