विकास के दावों के बीच बदहाल हुई चिरमिरी न्यायालय की राह

विकास के दावों के बीच बदहाल हुई चिरमिरी न्यायालय की राह!
चिरमिरी – नगर की चकाचौंध और विकास की बड़ी-बड़ी बातों के बीच, न्याय के मंदिर ‘चिरमिरी न्यायालय’ की ओर जाने वाली सी.सी. सड़क अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही है। यह स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब न्याय की गुहार लगाने वालों को इस जर्जर रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है।
जर्जर सी.सी. सड़क और ‘ब्लाइंड स्पॉट’ बनी झाड़ियाँ
मुख्य मार्ग से न्यायालय की ओर मुड़ने वाली सी.सी. सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है। कंक्रीट की परतें जगह-जगह से टूटकर जानलेवा गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। इसके साथ ही, गोदरीपारा-डोमनहिल मुख्य मार्ग पर सड़क के किनारों पर उगी घनी और बेतरतीब झाड़ियों ने राहगीरों की मुसीबत को दोगुना कर दिया है। ये झाड़ियाँ इतनी ऊँची और फैली हुई हैं कि मोड़ पर दूसरी तरफ से आने वाली गाड़ियाँ दिखाई नहीं देतीं। यह स्थिति वकीलों, फरियादियों और न्यायालयीन कर्मचारियों के लिए हर दिन किसी बड़ी दुर्घटना का निमंत्रण दे रही है।
प्रथम नागरिक की खामोशी: अपनों की मांग से किनारा?
इस पूरे मामले में सबसे विडंबनापूर्ण पहलू राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव है। गौरतलब है कि क्षेत्र के वर्तमान प्रथम नागरिक (महापौर) इसी न्यायालय में वकालत करते हुए चुनाव जीतकर इस प्रतिष्ठित कुर्सी पर बैठे हैं। हैरानी की बात तो यह है कि अपने अधिवक्ता कार्यकाल के दौरान, जब वे अधिवक्ता संघ के सचिव थे, तब उन्होंने इसी खराब सी.सी. सड़क की मरम्मत के लिए तत्कालीन नगर प्रशासन को कड़ा विरोध जताते हुए ज्ञापन सौंपा था। आज उन्हें महापौर बने एक वर्ष से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन जिस समस्या के लिए उन्होंने कभी आवाज़ उठाई थी, आज उसी पर उनकी चुप्पी समझ से परे है। अपने ही अधिवक्ता साथियों और सहकर्मियों की बुनियादी मांग की ओर ध्यान न देना अब नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
ग्रामीण क्षेत्रों से भी बदतर मोहल्ले के हालात
न्यायालय से बिल्कुल सटे मोहल्ले की स्थिति किसी सुदूर पिछड़े ग्रामीण क्षेत्र से भी बदतर नज़र आती है। यहाँ पक्के मकानों के बजाय लकड़ी, टिन और तिरपाल से बनी झोपड़ियाँ विकास के खोखले वादों की कलई खोलती हैं। संकरी गलियाँ और ऊपर से गुजरते बिजली के तारों का खतरनाक जाल इस क्षेत्र की उपेक्षा को साफ़ दर्शाता है।
एक बड़ा सवाल:
क्या प्रशासन और स्वयं महापौर अपनी पुरानी मांगों को भूल चुके हैं? क्या एक आधुनिक न्यायालय के प्रवेश मार्ग और उसके समीपवर्ती क्षेत्र को इस तरह उपक्षित छोड़ देना उचित है? आम जनता और अधिवक्ता संघ अब ‘हवाई वादों’ से ऊपर उठकर धरातल पर काम और एक सुरक्षित मार्ग की मांग कर रहे हैं।




