छत्तीसगढ़

डबल इंजन सरकार और नगर निगम की उपेक्षा: चैत्र नवरात्रि के पहले दिन भी झाड़ू को तरसा त्यागी बाबा का आश्रम और राम जानकी मंदिर

डबल इंजन सरकार और नगर निगम की उपेक्षा: चैत्र नवरात्रि के पहले दिन भी झाड़ू को तरसा त्यागी बाबा का आश्रम और राम जानकी मंदिर

चिरमिरी, छत्तीसगढ़
एक ओर जहाँ पूरा देश अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण और रामराज्य की परिकल्पना से आह्लादित है, वहीं कोयला नगरी चिरमिरी में आस्था का एक केंद्र अपनी बदहाली पर आँसू बहा रहा है। यह व्यथा है कुरासिया कॉलरी से विस्थापित होकर गोदरीपारा रीजनल अस्पताल के सामने स्थापित ‘श्री श्री 1008 श्री फलाहारी बाबा जी’ द्वारा संचालित राम जानकी मंदिर की।
​विस्थापन से उपेक्षा तक का सफर
​कभी कुरासिया 10 नंबर दफाई क्षेत्र की शान रहा यह मंदिर SECL के विस्थापन के दौरान पूरे विधि-विधान और भारी जन-उत्साह के साथ गोदरीपारा लाया गया था। उस वक्त यज्ञ, पूजा-पाठ और अनुष्ठानों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा था। लेकिन समय के क्रूर चक्र ने आज इस सिद्ध स्थान को हाशिए पर धकेल दिया है।


​व्यवस्था की मार और बिखरती समिति
​मंदिर के संचालक सिद्ध पुरुष फलाहारी त्यागी बाबा की उम्र बढ़ने के साथ उनकी शारीरिक क्षमता अब जवाब देने लगी है। विडंबना यह है कि मंदिर की देखरेख में जुटे पुराने सेवादार या तो सेवानिवृत्त होकर शहर छोड़ चुके हैं या काल के गाल में समा गए हैं। सेवादारों की कमी और मंदिर समिति के कमजोर पड़ने से आज बाबा और मंदिर, दोनों ही उपेक्षित हैं।
​सत्ता और निगम की बेरुखी पर सवाल
​हैरानी की बात यह है कि वर्तमान में राज्य में ‘सनातन और राम’ के नाम पर समर्पित भाजपा की सरकार है और चिरमिरी नगर पालिक निगम में भी इसी विचारधारा का नेतृत्व है। स्थानीय लोगों का कहना है कि:
​जहाँ भीड़ होती है, वहाँ त्यौहारों से पहले नगर निगम द्वारा रंग-रोगन और लाइटिंग की चकाचौंध कर दी जाती है।
​इसके विपरीत, इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्र की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
​आज चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिन है, लेकिन मंदिर परिसर की स्थिति इतनी दयनीय है कि यहाँ रंगाई-पुताई तो दूर, ठीक से साफ-सफाई और झाड़ू तक नहीं लगवाई गई है।
​”क्या सनातन धर्म के प्रति आस्था सिर्फ भीड़भाड़ वाले आयोजनों तक सीमित है? एक वृद्ध संत और विस्थापित राम-जानकी मंदिर की यह दुर्दशा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।” — स्थानीय श्रद्धालु
​प्रशासन से उम्मीद
​स्थानीय नागरिकों और धर्मप्रेमियों ने मांग की है कि नगर पालिक निगम और राज्य शासन तत्काल हस्तक्षेप करें। चैत्र नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मंदिर की गरिमा बहाल की जाए और वृद्ध त्यागी बाबा को उचित सहयोग प्रदान किया जाए।

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